➤ कुफरी-फागू में CII ने 7वां एप्पल कॉन्क्लेव आयोजित किया, 200 से अधिक बागवान शामिल
➤ AI तकनीक, कीटनाशक, बीमा और निर्यात जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने दिए टिप्स
➤ मौसम की मार से उत्पादन घटने का अनुमान, बागवानों ने जमीनी काम पर उठाए सवाल
शिमला के पास कुफरी (फागू) में Confederation of Indian Industry (CII) द्वारा हिमाचल प्रदेश के सेब उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 7वां ‘एप्पल कॉन्क्लेव’ आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश भर से 200 से अधिक प्रोग्रेसिव बागवानों ने भाग लिया। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य सेब की उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और बागवानों की आय में सुधार के लिए आधुनिक तकनीक और नीतिगत उपायों पर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बागवानों को AI-आधारित बागवानी प्रबंधन, नई कीटनाशक तकनीकों, फसल बीमा, निर्यात के अवसर, ब्रांडिंग और पैकेजिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। CII हिमाचल चैप्टर के चेयरमैन संजय सूरी ने कहा कि इस तरह के मंच बागवानों को नई सोच और तकनीक से जोड़ने का काम करते हैं, जिससे वे बदलते समय के साथ खुद को अपडेट कर सकें।
बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने भी इस तरह के आयोजनों को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि मौसम की मार के कारण सेब उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पिछले वर्ष जहां प्रदेश में करीब 7 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार यह घटकर लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। ऐसे में किसानों और बागवानों को नई तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत बन गया है।
हालांकि, इस कॉन्क्लेव को लेकर कुछ बागवानों ने नाराजगी भी जताई। स्थानीय बागवान मनु शर्मा का कहना है कि नीतियां जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो रही हैं और कई बार ऐसे सेमिनार सिर्फ कंपनियों के उत्पाद बेचने का माध्यम बन जाते हैं। उनका आरोप है कि बागवानों की असल समस्याओं का समाधान करने के लिए फील्ड लेवल पर ठोस काम नहीं हो रहा।
कुल मिलाकर यह कॉन्क्लेव जहां एक ओर नई तकनीक और संभावनाओं का मंच बना, वहीं दूसरी ओर बागवानों की चुनौतियां और नाराजगी भी सामने आई, जो सरकार और उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।



